नई दिल्ली: देश के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के ऋणदाता, भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के ग्राहकों के लिए आने वाले दिन मुश्किल भरे हो सकते हैं। ऑल इंडिया स्टेट बैंक ऑफ इंडिया स्टाफ फेडरेशन (AISBISF) ने अपनी 16 सूत्रीय मांगों को लेकर 25 और 26 मई 2026 को दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। चूंकि 23 मई को चौथा शनिवार है और 24 मई को रविवार, इस वजह से बैंक लगातार चार दिनों तक बंद रह सकते हैं, जिससे कामकाज पूरी तरह ठप होने की आशंका है।
हड़ताल का मुख्य कारण बैंक प्रबंधन द्वारा कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित मांगों की अनदेखी करना बताया जा रहा है। यूनियन का आरोप है कि बैंक में कर्मचारियों के अधिकारों का हनन हो रहा है और द्विपक्षीय समझौतों को सही ढंग से लागू नहीं किया जा रहा है। फेडरेशन ने स्पष्ट किया है कि यदि हड़ताल की इन तारीखों में से कोई भी सार्वजनिक अवकाश के दिन पड़ती है, तो विरोध प्रदर्शन को 27 मई तक बढ़ाया जाएगा, जिससे व्यवधान और लंबा खिंच सकता है।
कर्मचारियों की 16 प्रमुख मांगें
यूनियन द्वारा पेश किए गए 16 सूत्रीय मांग पत्र में सबसे प्रमुख मांग स्थायी नौकरियों की आउटसोर्सिंग को रोकना है। कर्मचारियों का कहना है कि सुरक्षा गार्डों और संदेशवाहकों (Messengers) की भर्ती पिछले तीन दशकों से रुकी हुई है, जिससे बैंक की सुरक्षा और संचालन पर बुरा असर पड़ रहा है।
अन्य प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के तहत पेंशन फंड मैनेजर चुनने की आजादी।
2019 के बाद भर्ती हुए कर्मचारियों के लिए इंटर-सर्कल ट्रांसफर की सुविधा।
HRMS सॉफ्टवेयर में आ रही तकनीकी खामियों का स्थायी समाधान।
क्रॉस-सेलिंग के नाम पर वित्तीय उत्पादों की 'मिस-सेलिंग' को रोकना।
मेडिकल रिइम्बर्समेंट स्कीम में सुधार और वेतन विसंगतियों को दूर करना।
आम जनता पर असर
इस हड़ताल के कारण शाखाओं में नकद जमा, निकासी, चेक क्लियरिंग और लोन से जुड़े काम पूरी तरह प्रभावित होंगे। हालांकि, बैंक ने ग्राहकों को आश्वस्त करने की कोशिश की है कि डिजिटल माध्यम जैसे YONO ऐप, इंटरनेट बैंकिंग और ATM सेवाएं चालू रहेंगी, लेकिन भारी ट्रैफिक या तकनीकी सहायता की कमी के कारण इनमें भी कुछ देरी हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि महीने के आखिरी हफ्ते में होने वाली इस हड़ताल से व्यापारियों और वेतनभोगियों को काफी असुविधा हो सकती है।
विरोध का कार्यक्रम
हड़ताल से पहले ही यूनियन ने दबाव बनाने के लिए सिलसिलेवार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। इसके तहत 19 मई को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और 21 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन सौंपा जाएगा। कर्मचारियों का कहना है कि यदि सरकार और बैंक प्रबंधन उनकी मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाते हैं, तो वे बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। फिलहाल, ग्राहकों को सलाह दी जा रही है कि वे अपने बैंकिंग से जुड़े जरूरी काम 23 मई से पहले ही निपटा लें।
SBI कर्मचारियों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल: 25-26 मई को बैंकिंग सेवाएं रहेंगी ठप, 5 दिनों तक काम प्रभावित होने के आसार