तिजारा मुख्य बाजार और प्रशासनिक क्षेत्र में इन दिनों भारी बेचैनी और मायूसी का माहौल है। सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा बिजली घर तिराहे से लेकर तिजारा थाना चौराहा तक सड़क चौड़ीकरण के लिए की गई 'निशानदेही' के बाद, क्षेत्र के दुकानदारों और मकान मालिकों को नोटिस थमा दिए गए हैं। विभाग ने दो टूक चेतावनी दी है कि 7 दिनों के भीतर स्वयं अतिक्रमण हटा लें, अन्यथा बुलडोजर चलेगा और होने वाली किसी भी टूट-फूट की जिम्मेदारी स्वयं अतिक्रमी की होगी।
PWD के इस फरमान के बाद से स्थानीय लोगों के सामने बेरोजगारी और आशियाने उजड़ने का संकट विकराल सर्प की भांति मुंह खोले खड़ा है।
सड़क के सेंटर से दोनों तरफ चाहिए 40-40 फीट जगह
सार्वजनिक निर्माण विभाग के मुताबिक, इस मार्ग को सुदृढ़ और चौड़ा करने के लिए सड़क के मध्य बिंदु (सेंटर) से दोनों ओर 40-40 फीट (कुल 80 फीट) जमीन की आवश्यकता है।
ग्राउंड रिपोर्ट: दुकानें तो होंगी साफ, कोर्ट परिसर भी आ रहा जद में
हमारे संवाददाता द्वारा मौके पर जाकर जब वस्तुस्थिति का जायजा लिया गया, तो बेहद चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। PWD को जहां दोनों तरफ 12.20 मीटर (40 फीट) जगह चाहिए, वहीं तहसील न्यायालय (कोर्ट कैम्पस) की दूरी सड़क के सेंटर से मात्र 4.50 मीटर ही है। इसके अलावा यदि 40 फीट के पैमाने को कड़ाई से लागू किया गया, तो इस मार्ग पर स्थित सैकड़ों निजी दुकानें पूरी तरह साफ हो जाएंगी, यानी उनका वजूद ही खत्म हो जाएगा।
बड़ा सवाल: आम जनता अज्ञानी, तो क्या सरकारी महकमे भी 'अतिक्रमी' हैं?
इस पूरे घटनाक्रम ने व्यवस्था पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। इस प्रभावित क्षेत्र में केवल निजी दुकानें या मकान ही नहीं हैं, बल्कि क्षेत्र के प्रमुख राजकीय संस्थान जैसे—राजकीय अस्पताल, पंचायत समिति, तहसील न्यायालय और पोस्ट ऑफिस भी विद्यमान हैं।
यदि PWD के 40 फीट के नियम को सही माना जाए, तो एक भी सरकारी संस्थान ऐसा नहीं है जो इस दायरे में न आता हो।
आम जनता के लिए यह माना जा सकता है कि उन्होंने भूलवश या अज्ञानता के कारण सड़क सीमा में निर्माण कर लिया।
लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या सरकारी संस्थानों को भी नियमों की जानकारी नहीं थी?
क्या यह सार्वजनिक निर्माण विभाग की लापरवाही नहीं है कि उसने समय रहते (दशकों से) लोगों और अन्य विभागों को यह नहीं बताया कि इस रोड का दायरा दोनों तरफ 40-40 फीट का है?
स्थानीय लोग अब इसे विभाग की 'ढैय्या-पच्ची' और 'दुपपलबाजी का खेल' मान रहे हैं, जिसकी असलियत कोई नहीं जानता।
विकास की आड़ में विनाश का डर: 'होली टीबा मार्ग' का उदाहरण
इस क्षेत्र में जलभराव और आगामी बारिश के मौसम को देखते हुए डर का माहौल है। लोगों का कहना है कि जो क्षेत्र कभी भारी भीड़ और रौनक वाला हुआ करता था, वह कल से वीरानियों के आगोश में चला जाएगा।
पुनः रोजगार स्थापित करने में कितना समय लगेगा, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। जनता का अविश्वास इसलिए भी गहरा है क्योंकि पिछले ढाई साल से 'होली टीबा मार्ग' का निर्माण कार्य अब तक अधर में लटका हुआ है। जब विभाग एक छोटा सा मार्ग ढाई साल में नहीं बना पाया, तो इस मुख्य मार्ग के उजड़ने के बाद इसके दोबारा बनने की क्या कल्पना की जा सकती है?
जनप्रतिनिधि मौन, 'कोल्हू में पिस रही जनता'
आज जो लोग इस क्षेत्र में अपने छोटे-मोटे प्रतिष्ठान चलाकर इज्जत की रोज़ी-रोटी कमा रहे थे, वे रातों-रात बेरोजगारी की कगार पर पहुंच गए हैं। विडंबना यह है कि इस संकट की घड़ी में न तो जनता का कोई हिमायती नजर आ रहा है और न ही किसी जनप्रतिनिधि ने आकर पीड़ितों का हाथ थामा है।
ऐसा प्रतीत होता है जैसे जनता को अपने हाल पर मरने के लिए छोड़ दिया गया है। फिलहाल, तिजारा की जनता बेबसी के आलम में घूंट के आंसू पी रही है और आने वाले 'बुलडोजर तंत्र' के खौफ से सहमी हुई है।
तिजारा में PWD के 'बुलडोजर' नोटिस से हड़कंप: क्या सरकारी संस्थान भी हैं 'अतिक्रमी'? रोज़ी-रोटी के संकट से सहमे लोग