भिवाड़ी क्षेत्र में अपराध की एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां खुद को फाइनेंस कंपनी की रिकवरी टीम बताकर राहगीरों को निशाना बनाने वाले गिरोह का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। इस मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने कोटकासिम इलाके में एक राहगीर से 18,500 रुपये की लूट की वारदात को अंजाम दिया था। आरोपियों के कब्जे से घटना में प्रयुक्त कार और 10 हजार रुपये नकद भी बरामद किए गए हैं।

पुलिस के अनुसार, यह गिरोह काफी सुनियोजित तरीके से वारदात को अंजाम देता था। आरोपी खुद को किसी फाइनेंस कंपनी की रिकवरी टीम का सदस्य बताकर लोगों को रोकते थे और उन पर कर्ज न चुकाने का दबाव बनाते थे। इसके बाद धमकाकर या झांसा देकर उनसे नकदी और कीमती सामान लूट लेते थे।

घटना कोटकासिम क्षेत्र की है, जहां एक राहगीर को इन आरोपियों ने बीच रास्ते में रोक लिया। उन्होंने खुद को फाइनेंस कंपनी के कर्मचारी बताते हुए व्यक्ति से पूछताछ शुरू कर दी और उसे कर्जदार बताते हुए पैसे देने का दबाव बनाया। जब राहगीर ने इसका विरोध किया, तो आरोपियों ने उसे धमकाकर 18,500 रुपये छीन लिए और मौके से फरार हो गए।

पीड़ित द्वारा दी गई शिकायत के आधार पर पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस टीम ने घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली और संदिग्ध वाहन की पहचान की। इसके बाद तकनीकी और मुखबिर तंत्र की मदद से आरोपियों की लोकेशन का पता लगाया गया।

जांच के दौरान पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग मिले, जिसके आधार पर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में आरोपियों ने वारदात को अंजाम देना स्वीकार कर लिया। पुलिस ने उनके कब्जे से लूट में इस्तेमाल की गई कार को जब्त कर लिया है, साथ ही 10 हजार रुपये नकद भी बरामद किए हैं।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि आरोपी पहले भी इस तरह की वारदातों में शामिल रहे हैं और अन्य मामलों में भी उनकी संलिप्तता की जांच की जा रही है। संभावना है कि यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और अलग-अलग इलाकों में इसी तरह लोगों को निशाना बना रहा था।

इस घटना ने क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है। पुलिस ने आमजन से अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति खुद को किसी फाइनेंस कंपनी का कर्मचारी बताकर पैसे की मांग करता है, तो उसकी पहचान और प्रमाण जरूर जांचें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत पुलिस को सूचना दें।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं लोगों की जागरूकता की कमी का फायदा उठाकर की जाती हैं। इसलिए जरूरी है कि लोग सतर्क रहें और बिना सत्यापन के किसी को भी पैसे न दें।

पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि फाइनेंस कंपनियों की रिकवरी प्रक्रिया एक निर्धारित कानूनी तरीके से होती है और कोई भी कर्मचारी इस तरह सड़क पर रोककर जबरन पैसे नहीं मांग सकता। यदि ऐसा कोई मामला सामने आता है, तो वह पूरी तरह से अवैध है।

फिलहाल तीनों आरोपियों को न्यायालय में पेश कर रिमांड पर लिया गया है, ताकि उनसे और पूछताछ कर गिरोह के अन्य सदस्यों और संभावित वारदातों का खुलासा किया जा सके। पुलिस इस मामले को गंभीरता से लेते हुए आगे की कार्रवाई में जुटी हुई है।

यह कार्रवाई जहां एक ओर पुलिस की सतर्कता और तत्परता को दर्शाती है, वहीं आम लोगों के लिए भी एक चेतावनी है कि वे इस तरह के फर्जी गिरोहों से सावधान रहें और अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूक रहें।