गुरुग्राम। दिल्ली-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-48) पर सफर करने वाले लोगों और विशेष रूप से बिनौला व मानेसर इंडस्ट्रियल एरिया में काम करने वाले लाखों श्रमिकों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर है. भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने इस औद्योगिक क्षेत्र में आए दिन होने वाले जानलेवा सड़क हादसों पर पूरी तरह से लगाम लगाने के लिए एक नया फुटओवर ब्रिज (FOB) बनाने का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया है.
इस औद्योगिक बेल्ट में बड़ी-बड़ी लॉजिस्टिक्स कंपनियों, ऑटोमोबाइल फैक्ट्रियों और ई-कॉमर्स दिग्गजों के विशाल वेयरहाउस स्थित हैं. इन फैक्ट्रियों में रोजाना हजारों की संख्या में दिहाड़ी मजदूर, डिलीवरी स्टाफ और स्थानीय ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर आठ लेन के इस बेहद तेज रफ्तार हाईवे को पैदल ही पार करने के लिए मजबूर थे. इस नए फुटओवर ब्रिज के बन जाने से श्रमिकों को अब एक सुरक्षित और सुलभ रास्ता मिल जाएगा, जिससे उन्हें अपनी जान का जुआ नहीं खेलना पड़ेगा.
ब्लैकस्पॉट बनेगा अब पूरी तरह सुरक्षित
दिल्ली-जयपुर एक्सप्रेसवे का बिनौला और मानेसर इंडस्ट्रियल एरिया के बीच का यह हिस्सा पिछले कुछ वर्षों में एक बड़े 'ब्लैकस्पॉट' (दुर्घटना संभावित क्षेत्र) के रूप में उभरा था. आंकड़ों के अनुसार, बीते दो वर्षों (2024 और 2025) में इस विशेष हिस्से पर 21 से अधिक गंभीर सड़क हादसे दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें से 14 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी. मरने वालों में आठ पैदल यात्री शामिल थे, जो केवल अपने काम पर जाने या घर वापस लौटने के लिए हाईवे पार करने की कोशिश कर रहे थे.
इस समस्या की गंभीरता को देखते हुए गुरुग्राम ट्रैफिक पुलिस के ट्रैफिक इंजीनियरिंग सेंटर (TEC) ने इस पूरे इलाके का एक विस्तृत सेफ्टी ऑडिट किया था. ऑडिट में पाया गया कि पीक आवर्स (सुबह और शाम के समय) के दौरान इस पॉइंट पर हर एक घंटे में 700 से अधिक पैदल यात्री एक्सप्रेसवे को पार करते हैं. तेज रफ्तार गाड़ियों के बीच से इस तरह पैदल गुजरना किसी बड़े खतरे से खाली नहीं था। रात के समय तो यह स्थिति और भी अधिक भयावह हो जाती थी, क्योंकि भारी ट्रकों और अंतरराज्यीय बसों की आवाजाही के कारण पैदल चलने वालों को गाड़ियों की गति का सही अंदाजा नहीं मिल पाता था.
NHAI का ₹282 करोड़ का मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट
बिनौला में बनाया जा रहा यह नया फुटओवर ब्रिज एक बहुत बड़े और व्यापक सुरक्षा प्रोजेक्ट का हिस्सा है. NHAI पूरे 59 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग के हिस्से पर (खेड़की धौला टोल प्लाजा से लेकर जयसिंहपुर खेड़ा बॉर्डर तक) कुल ₹282 करोड़ की भारी भरकम लागत से नौ नए फुटओवर ब्रिज का निर्माण कर रहा है.
इस मेगा प्रोजेक्ट के तहत जिन अन्य प्रमुख और महत्वपूर्ण स्थानों पर फुटओवर ब्रिज बनाए जा रहे हैं या प्रस्तावित हैं, उनमें शिकोहपुर, मानेसर, राठीवास, मालपुरा, जयसिंहपुर खेड़ा, सिधरावली, खरखड़ा और खजुरी शामिल हैं. NHAI के अधिकारियों के अनुसार, बिनौला में चल रहा यह काम अंतिम चरणों में है और इसका ढांचा लगभग खड़ा किया जा चुका है. कुछ स्थानीय जमीन मालिकों की आपत्तियों और अलाइनमेंट को लेकर आए विवादों के कारण इस परियोजना की गति बीच में थोड़ी धीमी जरूर हुई थी, लेकिन ट्रैफिक पुलिस के टेक्निकल क्लियरेंस और व्यावहारिक रिपोर्ट के बाद अब काम को पूरी रफ्तार से पूरा किया जा रहा है.
आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा नया FOB
ट्रैफिक इंजीनियरिंग सेंटर और NHAI के नए मानकों के अनुसार, इस फुटओवर ब्रिज को केवल एक सामान्य लोहे या कंक्रीट का ढांचा नहीं बनाया जा रहा है, बल्कि इसमें पैदल यात्रियों की सहूलियत के लिए कई आधुनिक फीचर्स जोड़े जा रहे हैं।
यह फुटओवर ब्रिज पूरी तरह से 'डुअल-एक्सेस' (दोनों तरफ से चढ़ने-उतरने की व्यवस्था) से लैस होगा. फैक्ट्रियों में काम करने वाले थके-हारे मजदूरों, बुजुर्गों और महिला श्रमिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इसमें सीढ़ियों के साथ-साथ स्वचालित एस्केलेटर (सड़क के दोनों ओर) लगाने की योजना है. इसके अतिरिक्त, इस योजना के तहत हाईवे के किनारे बने उन खुले और बड़े नालों को भी पूरी तरह से कंक्रीट के स्लैब से ढका जा रहा है, जो वर्तमान में पैदल यात्रियों के लिए एक बड़ा अवरोध बने हुए हैं और जिन्हें लांघकर लोगों को एक्सप्रेसवे के मुख्य कैरिजवे तक पहुंचना पड़ता था.
बसों और ऑटो के स्टॉपेज के लिए बनेगा नया सिस्टम
इस इलाके में हादसों का एक बड़ा कारण यह भी है कि हर घंटे लगभग 32 अंतरराज्यीय बसें और 22 से अधिक शेयरिंग ऑटो-रिक्शा सीधे एक्सप्रेसवे की मुख्य लेन पर ही रुकते हैं. इसके कारण एक बार में करीब 250 से 300 यात्री सीधे मुख्य सड़क पर उतरते हैं और वहीं से अनियंत्रित होकर सड़क पार करने की कोशिश करते हैं.
नए मास्टर प्लान के तहत अब बसों और ऑटो के इस तरह एक्सप्रेसवे पर सीधे रुकने पर पूरी तरह से पाबंदी लगाई जाएगी। उनके बोर्डिंग और डी-बोर्डिंग पॉइंट्स को पूरी तरह से सर्विस लेन पर शिफ्ट किया जा रहा है. सर्विस लेन पर उतरने के बाद यात्री सीधे फुटओवर ब्रिज के एस्केलेटर के जरिए बिना मुख्य हाईवे को छुए दूसरी तरफ सुरक्षित निकल सकेंगे. इसके साथ ही, एनक्रोचमेंट (अवैध कब्जों) और रेहड़ी-पटरी वालों को भी इस बफर जोन से दूर रखने के लिए सख्त नियम बनाए जा रहे हैं ताकि पैदल यात्रियों का रास्ता कभी ब्लॉक न हो.
स्थानीय लोगों और औद्योगिक घरानों में खुशी का माहौल
इस निर्णय के बाद से बिनौला, मानेसर और आसपास के ग्रामीण अंचलों में भारी उत्साह देखा जा रहा है. स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह केवल एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि यह इस इलाके के कामकाजी लोगों के लिए एक जीवनदायिनी (लाइफलाइन) साबित होगा. कई फैक्ट्रियों के प्रबंधकों ने भी NHAI के इस कदम की सराहना की है, क्योंकि सड़क हादसों में उनके कुशल श्रमिकों को जान गंवानी पड़ती थी, जिससे औद्योगिक शांति और मनोबल पर बुरा असर पड़ता था.
ब्रिज का काम जैसे ही पूरा होगा, वैसे ही एक्सप्रेसवे पर लगे अवैध और असुरक्षित डिवाइडर कट्स को भी कंक्रीट की दीवारों से हमेशा के लिए सील कर दिया जाएगा, जिससे कोई भी व्यक्ति शॉर्टकट के चक्कर में नीचे से पटरी पार करने का जोखिम न उठा सके. इस बड़े बदलाव के बाद दिल्ली-जयपुर हाईवे का यह पूरा औद्योगिक गलियारा पूरी तरह से एक्सीडेंट-फ्री और सुगम हो जाएगा.
Gurugram News: बिनौला और मानेसर इंडस्ट्रियल एरिया के लिए बड़ी खबर, हादसों को रोकने के लिए बनेगा नया FOB