नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली में इन दिनों एक गुप्त सांस्कृतिक और धार्मिक अभियान की चर्चाएं जोरों पर हैं। दावा किया जा रहा है कि दिल्ली के एक गुप्त ठिकाने पर हर हफ्ते 'शुद्धिसभा' (घर वापसी कार्यक्रम) का आयोजन किया जा रहा है, जहाँ औसतन 400 लोग स्वेच्छा से सनातन धर्म (हिंदू धर्म) अपना रहे हैं। इस अभियान से जुड़े आयोजकों का दावा है कि वे देश भर में हर साल करीब 2.5 लाख लोगों की 'घर वापसी' करा रहे हैं। इसी कड़ी में एक बेहद चौंकाने वाला और ऐतिहासिक मामला सामने आया है, जहाँ जयपुर के प्रसिद्ध आमेर घराने और मुगल काल के दिग्गज सेनापति राजा मानसिंह के वंशज होने का दावा करने वाले एक मुस्लिम व्यक्ति 'अनवर' ने शुद्धिसभा के माध्यम से हिंदू धर्म अपना लिया है। धर्म परिवर्तन के बाद उनका नया नाम 'नरेश' रखा गया है।
कौन हैं अनवर से 'नरेश' बने राजा मानसिंह के वंशज?
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाली घटना अनवर (अब नरेश) की घर वापसी है। आयोजकों और कुछ ऐतिहासिक दस्तावेजों का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि अनवर का परिवार सदियों पहले मुगल काल के दौरान परिस्थितियों वश धर्मांतरित हो गया था। वे इतिहास के प्रसिद्ध कछवाहा राजपूत राजा मानसिंह के वंश से ताल्लुक रखते हैं।
शुद्धिसभा में वैदिक मंत्रोच्चार और यज्ञ-हवन के बीच अनवर ने पवित्र जनेऊ धारण किया और सनातन धर्म में वापस लौटे। इस अवसर पर उन्होंने भावुक होते हुए कहा, "हमारे पूर्वज सनातनी थे, लेकिन इतिहास के किसी मोड़ पर किन्हीं कारणों से परिवार को अपनी जड़ें छोड़नी पड़ी थीं। आज मुझे ऐसा महसूस हो रहा है जैसे मैं सदियों बाद अपने असली घर लौट आया हूँ। नरेश नाम पाकर मैं खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा हूँ।"
कैसे काम करती है 'सीक्रेट शुद्धिसभा'?
राजधानी दिल्ली में चल रही इस शुद्धिसभा को बेहद गोपनीय रखा जाता है। आयोजकों के मुताबिक, सुरक्षा कारणों और अवांछित विवादों से बचने के लिए इसके आयोजन स्थल और समय को गुप्त रखा जाता है। इस सभा में शामिल होने वाले लोगों की पूरी कानूनी और प्रशासनिक कागजी कार्रवाई पहले ही पूरी कर ली जाती है, ताकि बाद में किसी भी तरह का कानूनी विवाद न खड़ा हो।
इस अभियान से जुड़े एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया:
"हम किसी पर कोई दबाव नहीं डालते और न ही किसी को लालच देते हैं। हमारे पास आने वाले अधिकांश लोग वे हैं जो इंटरनेट, सोशल मीडिया या धार्मिक ग्रंथों को पढ़कर खुद अपनी जड़ों की तलाश में आते हैं। हर हफ्ते लगभग 400 लोग इस प्रक्रिया से गुजरते हैं। हमारा लक्ष्य इस साल के अंत तक देश भर में 2.5 लाख लोगों की घर वापसी के आंकड़े को छूना है।"
देशव्यापी 'घर वापसी' का बड़ा दावा
आयोजकों का यह भी दावा है कि यह अभियान केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और बिहार जैसे राज्यों में भी छोटे स्तर पर ऐसी कई समितियां काम कर रही हैं। इन सभी का डेटा दिल्ली के मुख्य केंद्र में संकलित किया जाता है। वार्षिक तौर पर 2.5 लाख लोगों की घर वापसी का यह आंकड़ा यदि सच है, तो यह देश के जनसांख्यिकीय (Demographic) परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव ला सकता है।
कानूनी और सामाजिक दृष्टिकोण
धार्मिक स्वतंत्रता के जानकारों का कहना है कि भारत का संविधान हर नागरिक को अपनी इच्छा से किसी भी धर्म को मानने, उसका प्रचार करने या उसे बदलने की आजादी देता है (अनुच्छेद 25)। यदि यह घर वापसी पूरी तरह से बिना किसी डर, दबाव या प्रलोभन के हो रही है, तो यह पूरी तरह से कानूनी है।
हालाँकि, इतनी बड़ी संख्या में गुप्त रूप से हो रहे इस अभियान को लेकर खुफिया एजेंसियों और पुलिस प्रशासन भी सतर्क है, ताकि कानून-व्यवस्था की स्थिति नियंत्रण में रहे और सामाजिक सौहार्द बना रहे। राजा मानसिंह के वंशज की इस घर वापसी के बाद यह मुद्दा आने वाले दिनों में देश की सामाजिक और राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस को जन्म दे सकता है।
दिल्ली की 'सीक्रेट शुद्धिसभा': हर हफ्ते 400 लोगों की सनातन में वापसी, राजा मानसिंह के वंशज अनवर भी बने 'नरेश'